Zindagi Shayari

इतना जल्दी दामन छोड़ दिया,

इतना जल्दी वादा तोड़ दिया,

अभी तो ज़िन्दगी का सांसें है बाकी,

और आपने अभी से याद करना छोड़ दिया

 

ऐसा नहीं की आपकी याद आती नहीं,

खता सिर्फ इतनी है की बताते नहीं,

आप ज़िन्दगी से ज़्यादा अनमोल हैं हमारे लिए,

समझते होंगे आप, यह सोच हम जताते नहीं

 

दो कदम तो सब चल लेते हैं पर

ज़िन्दगी भर का साथ कोई नहीं निभाता

अगर रो कर भुलाई जाती यादें

तो हंसकर कोई ग़म ना छुपाता

 

ज़िन्दगी तेरे बिना अधूरी है,

ना जाने क्यों तेरे मेरे बीच ये दूरी है,

सोचता हूँ भुला दूँ तुझको पर क्या करू

तेरी एक मुस्कराहट मेरी कमज़ोरी है.

 

 

 

 

आगोश में लेलो मुझे तनहा हूँ मैं,

बसा लो दिल की धड़कन में तनहा हूँ मैं,

जो तुम नहीं ज़िंदगी में तो कुछ नहीं,

समा जाओ मुझ में की तनहा हूँ में

 

रोये है बहुत तब जरा करार मिला है,

इस जहाँ में किसे भला सच्चा प्यार मिला है,

गुज़र रही है ज़िंदगी इम्तेहान के दौर से,

एक ख़तम हुआ तो दूसरा तैयार मिला है

 

उसने मुझसे पूछा मुझ बिन

कैसी होती है तुम्हारी ज़िन्दगी?

मैंने भी मुस्कुरा कर उसकी

आँखों को बंद कर लिया,

और पूछा अब क्या दिख रहा है ?

उसने खा सिर्फ अँधेरा है अँधेरा

तो में कहा ऐसी होती है

तुम बिन मेरी ज़िंदगी

 

 

कुछ अधूरी ख्वाहिशों का सिलसिला है ज़िन्दगी,

मंज़िलों से एक मुसलसल फासला है ज़िन्दगी

मेरे दरवाज़े पे दस्तक दे के छुप जाने का खेल,

कब तलक खेलेगी यह क्या बचपना है ज़िन्दगी

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