Urdu Shayari

हम से कोई ताल्लुक़ – ऐ- खातिर तो है  उसे

वो यार बावफ़ा ना सही बेवफा तो है

 

सुना था तेरी महफ़िल मे सुकून – ए – दिल भी  मिलता है

मगर हम जब भी तेरी महफ़िल से आये बेकरार आए

Urdu Shayari

दिल आबाद कहाँ रह पाए उसकी याद भुला देने से

कमरा वीरान हो जाता है एक तस्वीर हटा देने से

 

परिंदों की फितरत से आये थे वो मेरे दिल में

जरा पंख निकल आये तो आशियाना छोड़ दिया

 

हैं अदल से तै रिश्ते मुझसे बेवफाइयों के,

हज़ारों ग़ालिब युही आते और चले जाते हैं,

अब अश्क़ कितने बहाओ कोई असर नहीं घायल,

बेहतर है इन्हें भी औरों की तरह भूल जाते हैं

 

मेरी किताब का हर पन्ना तेरी नज़र का मुहताज है,

पड़ना तेरे बस में नहीं जला तो सही

 

नफरत सर उठा कर घूमती रही

और इश्क़ ताबीज़ों में रह गया

 

अपने नेताओं के जो काम हैं बेढंगें हैं.

चोर बाज़ारी कहीं और कहीं दंगे हैं,

एवं इ सियासत में कोई कहे गया किसको,

देखता हूँ इस हम्माम में सब नंगें हैं.

 

अजीब सी एकता देखि लोगो की ज़माने में

ज़िन्दों को गिराने में और मुर्दो को उठाने में

 

ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं,

साफ़ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।

 

ख़ाक से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती छोटी मोटी बात पे हिज़रत नहीं होती

पहले दीप जलें तो चर्चे होते थे और अब शहर जलें तो हैरत नहीं होती

 

डर मुझे भी लगा फासला देख कर

पर मैं चलता रहा रास्ता देख कर

खुद- ब- खुद मेरे नज़दीक आती गयी

मेरी मंज़िल मेरा होंसला देख कर

 

बन्दे तो साथ छोड़ जाते हैं हर मोड़ पर

कभी भरोसा खुद की जात पर तो कर के देखो

 

मैं, मैं से निकल कर तुझ में खो गया

तू  मुझ में हर लम्हा जलवा गार हो गया