Sanam Teri Kasam Shayari

हमने माँगा था साथ उनका,

जुदाई का गम दे गए,

हम यादों के सहारे जी लेते,

वो भूल जाने की कसम दे गए

 

वादे करते हैं, कसमें कहते है,

फिर भी ना जाने क्यों लोग साथ छोड़ जाते हैं,

हमें तो तकलीफ होती है फूल तोड़ने में भी,

ना जाने लोग दिल कैसे तोड़ जाते हैं

 

कब टूट जाये कसम, कसम ही तो है,

कब बदल जाये नज़र, नज़र ही तो है,

तू मेरे साथ की आदत मत डाल,

कब बिछड़ जाये ज़िंदगी ही तो है

 

कर दिया ना फिर से तनहा,

कसम तो ऐसी दी थी,

जैसे अब तुम सिर्फ मेरे हो

 

तेरी महफ़िल सजाने की

कसम खाके बैठे है,

इसलिए अश्को को,

छुपा के बैठे है

 

जो वक़्त के साथ बदल जाये वो यार कैसा,

जो ज़िंदगी भर साथ ना दे वो हमसफ़र कैसा,

अक्सर लोग प्यार में कसमे खाते है,

जो कसमें का मोहताज हो वो प्यार कैसा

 

बदलना आता नहीं हमे मौसम की तरह,

हर एक रूत में तेरा इंतज़ार करते है,

ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक,

कसम तुम्हारी तुम्हे हम इतना प्यार करते है

 

तेरी कसम मैं सर को झुकने से बच से बच गया,

रुक रुक कर हँसा, अश्क़ बहाने से बच गया,

नूरे महफ़िल था तू सबकी निगाहे तुझ पर थी,

मैं हर नज़र से नज़रे मिलाने से बच गया,

ज़ाहिर था मुझपे साफ़, की तू बेक़रार है ,

जब पावं में तेरे, तेरा दमन उलझ गया

 

 

जब भी किसी को पास पाया है

कसम खुदा की वहीँ धोखा खाया है

क्यों दोष देते है हम काटों को ही

ज़ख़्म तो हमने फूलो से ही पाया है

 

उम्मीद का दमन गर यूँ छोड़ दोगे,

खुदा कसम खुद को बेमौत मार लोगे,

जिनको अपना समझने की भूल किये,

उनके ही दर पर दम को तोड़ दोगे

 

 

चिराग में अगर नूर ना होता,

तनहा दिल मजबूर ना होता

कसम से हम आपसे मिलने जरूर आते

अगर आपका आशियाना  इतना दूर ना होता

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