Nasha Shayari

नशा हम करते हैं
इल्जाम शराब को दिया जाता है ,
लेकिन इसमें कुसूर शराब का नहीं
उनका है जिनका चेहरा हर जाम में नज़र आता है

रात चुपचुप है मगर चाँद खामोश नहीं
कैसे कह दू आज फिर होश नहीं
ऐसे डूबा तेरी आँखों की गहराई में
हाथ में जाम है मगर पीने का होश नहीं

जाम से कभी इतनी नफरत ना करो
की पीना चाहो तो कभी पी ना सको
किसी को इतना प्यार ना करो
की बिछड़ कर जीना चाहो तो जी ना सको

सोचा था ना होंगे ज़िन्दगी में कभी रुस्वा ,
मगर प्यार की रुस्वाई तबाह कर गयी ,
गए थे महफ़िल में गम भुलाने ,
वह भी तन्हाई अपना फ़र्ज़ अदा कर गयी

ये कैसा नशा है ,
मैं किस खुमार में हूँ ,
वो आके जा भी चूका है ,
और में अब तक इंतज़ार में हूँ

ना करो यूँ बदनाम शराब को ,
दर्द -ऐ -दिल की दवा कहकर-ऐ -दोस्तों ,
शराब का नशा अब चढ़ता नहीं मुझे ,
मोहब्बत का नशा उतरने के बाद

न पीने का शौक था , ना पिलाने का शौक था ,
हमे तो सिर्फ नज़र मिलाने का शौक था ,
पर क्या करे यारो , हम नज़र ही उनसे मिला बैठे ,
जिन्हे सिर्फ नज़रो से पिलाने का शौक था

कुछ इश्क़ का नशा था ,
पहले हमको फ़रज़,
दिल जो टुटा तो ,
नशे से मोह्बत हो गयी

कुछ नशा तो आपकी बात का है ,
कुछ नशा तो धीमे बरसात का है ,
हमे आप यही शराबी ना समझे ,
कुछ असर तो आपकी मुलाकात का है

नशा मोहब्बत का हो , शराब का या दोस्ती का ,
होश तीनो में खो जाते है ,
फ़र्क़ सिर्फ इतना है कि ,
शराब सुला देती है , मोहबात रुला देती है ,
और दोस्ती यारो कि याद दिला देती है

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