Narazgi Shayari

हम हस्ते है तुम्हे हँसाने के लिए ,

हम ये ज़िंदगी जीते है तुम्हे पाने के लिए ,

तुम एक बार हमसे रूठ कर के तो देखना ,

हम मर जायेंगे तुमको मानाने के लिए

 

उनसे रोज मिलने को दिल चाहता है ,

कुछ सुनने सुनाने को दिल चाहता है ,

था किसीके मानाने का अंदाज़ ऐसा,

के फिर रूठ जाने को दिल करता है

 

 

हमरा दमन भी खुशीआं से ना-काफी है,

आज उन खुशियों को पूरा करने के लिए वापिस लौट आओ,

हमारा हर बात पर रूठना और तुम्हारा मानना,

आज उन खूबसूरत पालो की खातिर वापिस लौट आओ

 

खत लिखा है पर खत के कोने पर,

वो अपनी आँख का आंसू मिटाना भूल गए,

रूठ कर दोनों एक जगह बैठे रहे,

मैं उसको वो मुझको मानना भूल गए

 

काश ऐसी कोई रुत कोई मौसम आये,

खुशियों भरे गीत हम लगें गुनगुनाने,

आज भी दिल मेरा इस आस पे ज़िंदा है,

एक रोज़ तो आएं  वो हम को मानने

 

मुझे तलाश है उसकी जो मेरे जैसा हो,

मेरी खातिर मरने का हौसला भी रखता हो,

अगर कभी रूठ जाऊ में उससे तो,

मुस्कुरा कर मनाये वो ऐसा हो

 

हर शख्स ने हम को ज़ख़्म दिए,

अब दिल को लगाना छोड़ दिया,

तुम रूठा करते थे हमसे,

अब हमने मानना छोड़ दिया,

तेरी याद बहुत आती थी हमको,

तुझे याद भी करना छोड़ दिया

 

कोई तो होता,

जो मेरी खवाहिश में उठकर रातों को खूब रोता,

दुखों की चादर लपेट केर हजूम_इ_दुनिया से दूर होता,

में रूठ जाता मनाता मुझको,

की चाहे मेरा कसूर होता, कोई तो होता

 

 

Narazgi Shayari Images

Narazgi ShayariNarazgi Shayari