Mulakat Shayari

ना जाने कौन सी बात आखरी होगी,

ना जाने कौन सा दिन आखरी होगा,

करनी है तो करलो जी भर के बातें,

ना जाने कौन सी मुलाक़ात आखरी होगी

 

आशिक़ आँखों की बात समझ लेते है,

वो ख्वाबो में आएं तो मुलाकात समझ लेते है,

रोता है आसमान अपनी ज़मीं के लिए,

लोग पागल है उसे बरसात समझ लेते है

 

नज़र ने नज़र से मुलाक़ात कर ली,

रहे दोनों चुप पर बात कर ली,

खुशियों का मौसम कुछ इस कदर बदला,

की इन आँखों ने रो-रो कर बरसात कर ली

 

ये इश्क़ वालो की किस्मत बुरी होती है,

हर मुलाकात जुदाई से जुडी होती है,

कभी भी देख लेना आजमाकर,

सच्चे प्यार को जुदाई ही नसीब होती है

 

बड़ी अजीब मुलाकातें होती होती थी हमारी,

वो सिर्फ मतलब से मिलते थे,

और हमे तो सिर्फ मिलने से मतलब था

 

 

 

दिल साफ़ करके,

मुलाकात की आदत डालो,

जब धुल हटती है तो ,

आइने भी चमक उठते है

 

जब मिलने लगा उसकी मोहब्बत में सुकून ,

फिर यूँ हुआ की वो मेरा साथ छोड़ गया,

अभी बहुत बाकि थी हसरतें दिल में,

मगर वो शक़्स अधूरी मुलाकात छोड़ गया

 

हर मुलाकात पर वक़्त का तकाजा हुआ,

हर याद पर दिल का दर्द ताजा हुआ,

सुनी थी सिर्फ लोगो से जुदाई की बातें,

आज खुद पर बीती तो हकीकत का अंदाज हुआ

 

दोस्ती तो सिर्फ एक इत्तेफाक है,

ये दो दिलों की मुलाकात है,

दोस्ती नहीं देखती दिन है या रात है,

इसमें तो सिर्फ वफादारी और ज़ज़्बात है

 

काश आपकी सूरत इतनी प्यारी ना होती,

काश आपसे मुलाकात हमारी ना होती,

सपनो में ही देख लेते हम आपको,

तो आज आपको देखने की बेकरारी नहीं होती

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