Majboori Shayari

औरों ने चेहरे से मोहब्बत की होगी,

हम ने दिल से चाहा है आपको,

मजबूरी कुछ ऐसी है हमारी,

चाह कर भी मोहब्बत देना सके आपको

 

मजबूरियाँ हमारी वो जान ना सके,

फरमानो को हमारे वो मान ना सके,

कहते है वो हमे मर कर भी चाहेंगे,

जीते जी हमे जो पहचान ना सके

 

यूँ घुट-घुट के मर जाना,

हमें मंज़ूर था लेकिन,

किसी काम-ज़र्फ़ पर

ज़ाहिर ना की मजबूरियां हमने

 

हर कोई किसी की मजबूरी नहीं समझता,

दिल से दिल की दूरी नहीं समझता,

कोई तो किसी के बिना मर मर के जीता है

और कोई किसी को याद करना भी जरूरी नहीं समझता

 

क्या गिला करें तेरी मजबूरियों का हम,

तू भी इंसान है कोई खुदा तो नहीं,

मेरा वक़्त जो होता मेरे मुनासिब,

मजबूरियों को बेच कर तेरा दिल खरीद लेता

 

मजबूरियों में जब कोई जुड़ा होता है,

जरूरी नहीं की वो बेवफा होता है,

देकर आपको आँखों में पानी,

तन्हाईओं में आपसे भी ज्यादा रोता है

 

 

एक अधूरी खवाहिश मेरी पूरी हो जाये,

मुझे याद करना उनकी मजबूरी हो जाये,

काश की कुछ ऐसा मजबूरी बन जाये उनकी,

उनकी हर खवाहिश हमारे बिना अधूरी हो जाये

 

कभी कभी सपने चोरी हो जाते है ,

हालत से लोग दूर हो जाते है,

पर कुछ यादें इतनी अच्छी होती है की,

उन्हें याद करने को हम मजबूर हो जाते है

 

जुदा है तो क्या हुआ दूरी तो नहीं,

बात भी ना हो ऐसी मजबूरी तो नहीं,

नज़र नहीं आते हो आप तो क्या हुआ,

इन आँखों में तस्वीर आपको अधूरी तो नहीं

 

कितने मजबूर है हम,

प्यार के हाथो,

ना तुझे पाने की औकात,

ना तुझे खोने का हौसला

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