मुझ सा कोई दुनिया में नादाँ भी न हो

 

में किसी से बेहतर करू क्या फर्क पड़ता है

में किसी का बेहतर करू तो बहुत फर्क पड़ता है

 

में उसका हु वो इस एहसास  से इंकार करता है

उसने किया था कभी ये एहसास पर आज इंकार करता है

जनता है में रुसवा नहीं रह सकती पर

भरी महफ़िल में भी रुसवा मुझे हर बार करता है

रुसवा ही राहु अगर यही चाहत है उसकी

पर फिर खफा रहने का वो अभिनय हर बार करता है

यकीन है सारी दुनिया की खफा है वो मुझसे लेकिन

मुझे मालूम है की हमी से वो प्यार करता है

 

एक आंसू ने बता दिया सब हाल दिल का

में समझा था की ये बेज़ुबान होता है

होता है बेजुबान पर बात सारी करता है

न कह कर भी सब कह लेता है

कहना सुनना क्या जब दिल से दिल मिले

अब बाटे हमारी बस दिल ही करता है

पढ़ लो आँखों में जो है लिखा

ये दिल आँखों में दिल की बात लिखता है

 

मन की दिल की बात कभी नहीं बताओगे

पर जो दिल कह गया जो कैसे उसे छुपाओगे

दिलकी बातें आँखों की जुबान बाहर आती है

ये तो सच है कैसे इसे झुठलाओगे

आँखों में है जो तुम्हारी कैसे उसे छुपाओगे

हमारे दिल में झाकने का मन करे कभी तो

हमारी आँखें दिल का हल बताएंगी

और जो आँखों में देख पाओगे

तो तस्वीर अपनी ही पाओगे

 

तुम्हारी आँखों में बसा है आशियाना हमारा

अगर जिन्दा हमें रखना चाहो तो

कभी आंसू मत लाना

तुम्हारी आँखों में आंसू हम देख नहीं पाएंगे

क्या पता जिंदगी से ही रुसवा हो जायँगे

चला जायेगा वो जो तुम्हारी कदर करता है

आंसू अगर अगर तुम्हे जो जिन्दा न हमें पाओगे

क्यों खुद से दूर करके हमें ऐसे तड़पाओगे

 

मुझ सा कोई दुनिया में नादाँ भी न हो

करके जो इश्क़ कहता है नुक्सान भी न हो

करा है इश्क़ जो झेलना पड़ेगा ही

इस दर्द-ऐ-दिल को सहना पड़ेगा भी