की पड़ोस में भी अब बचाने वाला कोई नहीं है

किस किस से शिकवा रखो

किस किस से शिकायत

यहाँ पर हर किसी के

चहरो पर है बनावट

न सोच बुरा उसका भी

जो तेरा बुरा चाहे

तेरे काम जरूर आएंगी

तेरे सत कर्मो की आदत

 

कुछ इस तरह उस फ़क़ीर ने

ज़िन्दगी की मिसाल दी

मुट्ठी में धुल ली और

हवा में उछाल दी

 

मुल्ला को मस्जिद में राम दिखाई दे

पंडित को मंदिर में रहमान दिखाई दे

हिंदुस्तान होगा जन्नत तब

जब इंसान को इंसान में इंसान दिखाई दे

 

जीवन में पीछे देखो अनुभव मिलेगा

जीवन में आगे देखो तो आशा मिलेगी

दाये बाए देखो तो सत्य मिलेगा

स्वयं के अंदर देखो तो परमात्मा

और आत्मविश्वास मिलेगा

 

 

ज़िन्दगी की हर उड़ान बाकि है

हर मोड़ पर एक इम्तिहान बाकि है

अभी तो तय किया है आधा सफर ज़िन्दगी का

बढ़ते ही रहना है होसलो से मंज़िल की तरफ

क्योंकि अभी तो मंज़िलो से आगे निकल जाना बाकि है

 

आसान नहीं ज़िन्दगी की रहो से गुजरना

नहीं आसान मंज़िल को पाना

जीने के लिए मिली है ज़िन्दगी सिर्फ एक

होने दो तमन्नाओ को अनेको से एक

इस रंग बदलती दुनिया में अपने रंग भरो

क्या पता कल हो न हो

 

हौसला रखो तुम अपने इरादों पर

कभी ना कभी मंज़िल को पा लोगे तुम

जरूरी नहीं हर बार हार ही हाथ लगे

कभी कभी अंधेरो में चिराग मिल जाते है

 

ज़मीं से जुड़कर आसमान की बात करो

स्वप्न नहीं हकीकत से मुलाकात करो

तूफ़ान से डरते है बुजदिल यारो

मुसीबत से डटकर दो दो हाथ करो

 

अब आसमानो में आने वाला कोई नहीं है

उठो की तुमको जगाने वाला कोई नहीं है

मददगार अपने ही हो तुम ये याद रखो

की पड़ोस में भी अब बचाने वाला कोई नहीं है

 

धार के विपरीत जाकर देखिये

ज़िन्दगी को आजमा कर देखिये

अँधियाँ खुद बदल लेंगी रास्ता

एक दीपक तो जलाकर देखिये